चटक रंग में - होली भजन

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

चटक रंग में, मटक रंग में,

धनीलाल रंग में, गोपाल रंग में ।

श्याम रंग संग होली खेलत गोपाल,

श्याम रंग संग होली खेलत गोपाल,

मनमोहन सलोन, रंग गए, रंग गए

ओ रंग गए नीले पीले लाल

ग्वाल बाल संग होली खेलत गोपाल,

मधुसूदन मनमोहने रंग गए, रंग गए

ओ रंग गए नीले पीले लाल

करत ठिठोल बाजवे मुरली,

इर्ली को रिझावे इतरावे उरली,

गाजे बाजे ढोल गावे ध्रुपद धमार

आपा धापी गोपियो में मच रही रार

भर-भर पिचकारी तिरछी-तिरछी धारी धाल

मधुसूदन मनमोहने रंग गए, रंग गए

ओ रंग गए नीले पीले लाल

ताली की टंकार, रंगो की गगरी

घंटो की गुंजार सुनावे कजरी

रंगो की फुहार भीगे नाद सुर ताल

अरे वैजंती बसंती रंग गई अचराज में नंद लाल

मायावी कान्हा ने रंग दियो थल अंबर पाताल

SantoKiVani Lyrics

माधव मदन मुरारी रंग गए, रंग गए

ओह रंग गए नीले पीले लाल

श्याम रंग संग होली खेलत गोपाल,

मनमोहन सलोन रंग गए, रंग गए

ओ रंग गए नीले पीले लाल

मनमोहन सलोन रंग गए, रंग गए

ओह रंग गए नीले पीले लाल

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।