चांदी दी थाली विच जोत जगा के

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Baba Balaknath Ji Di Arti Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

(ओ पौणाहारिया, तेरे दरबार अंदर,

लाखां आवंदे ते, लाखां जावंदे ने ।

कोई, दूध मंगदा, ते कोई, पुत्त मंगदा,

ते कोई, खैर परिवार दी, चाहवंदे ने ॥)

चांदी दी, थाली विच, जोत जगा के ॥

नित्त तेरी, आरती करां, पौणाहारिया,

नित्त तेरी, आरती करां ॥

पैरां विच, पऊए बाबा, किन्नے सोहणे लगदे x॥

श्रद्धा नूं, भाग तेरे, बूहे ते लगदे x॥

ओ चरणां च, सीस मैं धरां, पौणाहारिया,

नित्त तेरी, आरती करां...

चांदी दी, थाली विच, जोत जगा के...

गल विच, सिंगी बाबा, किन्नी सोहणी लगदी x॥

बगल च, झोली बाबा, किन्नी सोहणी फबदी x॥

ओ रहमतां दी कर दियो छां, पौणाहारिया,

नित्त तेरी, आरती करां...

चांदी दी, थाली विच, जोत जगा के...

पौणाहारिया गुलाब दियां फुल्ला,

भगतां ने, तेरी वाशना लैणी,

दूधाधारिया गुलाब दियां फुल्ला,

बच्च्यां ने, तेरी वाशना लैणी ॥

गुफा, तेरी उत्ते बाबा, रोट ने चढ़दे x॥

भगवें ने, झंडे बाबा, दर तेरे चढ़दे x॥

ओ हथ जोड़, अरज करां, पौणाहारिया,

नित्त तेरी, आरती करां...

चांदी दी, थाली विच, जोत जगा के...

चेत दे, महीने बड़ा, संगतां दा जोर x॥

गुफा उत्ते, देखे मैं तां, पैलां पाउंदे मोर x॥

ओ जदों, देखिया, द्वारा तेरा खुल्ला,

भगतां ने, तेरी वाशना लैणी,

पौणाहारिया गुलाब दियां फुल्ला,

भगतां ने, तेरी वाशना लैणी...

पौणाहारिया गुलाब दियां फुल्ला...

सीस उत्ते, बाबा तेरे, जोग ने सुनहरी x॥

जोगियां दे, वाली तेरी, रमज है गहरी x॥

ओ बूटा तैनूं, मनदा है तां, पौणाहारिया,

नित्त तेरी, आरती करां...

चांदी दी, थाली विच, जोत जगा के...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।