जब चंद देव ने लगाया गुरु रामदास को गले - सत्य कथा

गुरु नानक देव जी
श्री राम कथा Prerak-kahani Chand Dev Prerak-kahani
॥ पावन पाठ ॥

श्री चंद से मुलाकात | लंबी दाढ़ी आपके चरणों की धूल पोंछने के लिए

जब गुरु नानक देव जी के वृद्ध पुत्र एवं 'उदासी' संप्रदाय के संस्थापक बाबा श्री चंद जी सिक्ख संप्रदाय के चतुर्थ गुरु रामदास जी से मिलने आए, तो उन्होंने उनसे पूछा कि उन्होंने इतनी लंबी दाढ़ी क्यों रखी हुई है?

गुरु रामदास जी ने गंभीरता से उत्तर दिया- आप जैसे पवित्र पुरुषों के चरणों की धूल पोंछने के लिए और फिर उन्होंने यह कहते-कहते विनम्रता का सर्वोच्च कार्य दिखाया।

यह देखकर बाबा श्री चंद जी ने उनका हाथ पकड़ लिया और गुरु रामदास जी को गले लगाते हुए कहा- बस, बहुत हो गया। आपके इसी चरित्र के कारण आपने मुझे मेरी पैतृक विरासत से वंचित कर दिया है।

अब, आपके धर्मपरायणता और हृदय की भलाई के लिए मैं आपको और क्या दे सकता हूँ?

बता दें: बाबा श्री चंद जी ने अपने पिता गुरु नानक द्वारा गुरुपद गुरु अंगद को सौंपने के निर्णय का विरोध किया था।

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सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

जब गुरु नानक देव जी के वृद्ध पुत्र एवं 'उदासी' संप्रदाय के संस्थापक बाबा श्री चंद जी सिख संप्रदाय के चतुर्थ गुरु रामदास जी से मिलने आए ...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।