चले है भोला, सज धज के

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

भोला तन पे भस्म लगाये,

मन में गौरा को बसाये,

चले है भोला,

सज धज के,

संखिया मंगल गाती हैं,

भूत प्रेत बाराती हैं ॥

भूत और प्रेत सब,

झूम झूम जाते हैं,

लूले और लँगड़े भी,

डिस्को दिखाते हैं,

भोला मन ही मन मुस्काये,

रूप अजब गजब हैं बनाये,

चले हैं भोला,

सज धज के ॥

पहुँची बारात,

सब मंगल गाते हैं,

देख देख शिव को,

सभी डर जाते हैं,

माता मैना रही घबराये,

शिव ऐसा रूप बनाये,

चले हैं भोला,

सज धज के ॥

मन में ये सोचें शिव,

सब डर जाते हैं,

विवाह कैसे होगा,

कोई पास न आते हैं,

तब सुंदर रूप बनाये,

चन्द्रशेखर नाम कहाये,

चले हैं भोला,

सज धज के ॥

गौरा के संग में,

ब्याह रचाते हैं,

लेके भवानी को,

कैलाश जाते हैं,

‘सूरज सोनी’ हरसाये,

ध्यान शिवजी के चरणों मे लगाए,

चले हैं भोला,

सज धज के ॥

भोला तन पे भस्म लगाये,

मन में गौरा को बसाये,

चले है भोला,

सज धज के,

संखिया मंगल गाती हैं,

॥ दोहा ॥

भूत प्रेत बाराती हैं ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।