बुरी परिस्थितियों में भी आशा नहीं छोड़ें - प्रेरक कहानी

पारंपरिक
अन्य कथा Prerak-kahani Horse Prerak-kahani
॥ पावन पाठ ॥

एक राजा ने दो लोगों को मौत की सजा सुनाई। उसमें से एक यह जानता था कि राजा को अपने घोड़े से बहुत ज्यादा प्यार है।

उसने राजा से कहा कि यदि मेरी जान बख्श दी जाए तो मैं एक साल में उसके घोड़े को उड़ना सीखा दूँगा। यह सुनकर राजा खुश हो गया कि वह दुनिया के इकलौते उड़ने वाले घोड़े की सवारी कर सकता है।

दूसरे कैदी ने अपने मित्र की ओर अविश्वास की नजर से देखा और बोला, तुम जानते हो कि कोई भी घोड़ा उड़ नहीं सकता! फिर तुमने इस तरह पागलपन की बात सोची भी कैसे? तुम तो अपनी मौत को एक साल के लिए टाल रहे हो।

पहला कैदी बोला: ऐसी बात नहीं है, मैंने दरअसल खुद को स्वतंत्रता के चार मौके दिए हैं।

◉ पहली बात राजा एक साल के भीतर मर सकता है।

◉ दूसरी बात मैं मर सकता हूं।

◉ तीसरी बात घोड़ा मर सकता है।

◉ और चौथी बात, हो सकता है, मैं घोड़े को उड़ना सीखा दूं।

कहानी की सीख यह है कि बुरी से बुरी परिस्थितियों में भी आशा नहीं छोड़नी चाहिए।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

बुरी परिस्थितियों में भी आशा नहीं छोड़ें | Buri Paristhitiyon Mein Bhi Asha Nahin Chhoden | Do not give up hope even in bad circumstances

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।