बृहस्पति स्तोत्र

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

पीताम्बर: पीतवपु: किरीटी,

चतुर्भुजो देवगुरु: प्रशान्त: ।

दधाति दण्डं च कमण्डलुं च,

तथाक्षसूत्रं वरदोsस्तु मह्यम ॥1॥

नम: सुरेन्द्रवन्द्याय देवाचार्याय ते नम: ।

नमस्त्वनन्तसामर्थ्यं देवासिद्धान्तपारग ॥2॥

सदानन्द नमस्तेस्तु नम: पीडाहराय च ।

नमो वाचस्पते तुभ्यं नमस्ते पीतवाससे ॥3॥

नमोsद्वितीयरूपाय लम्बकूर्चाय ते नम: ।

नम: प्रह्रष्टनेत्राय विप्राणां पतये नम: ॥4॥

नमो भार्गवशिष्याय विपन्नहितकारक: ।

नमस्ते सुरसैन्याय विपन्नत्राणहेतवे ॥5॥

विषमस्थस्तथा नृणां सर्वकष्टप्रणाशनम ।

प्रत्यहं तु पठेद्यो वै तस्य कामफलप्रदम ॥6॥

॥ दोहा ॥

॥ इति मन्त्रमहार्णवे बृहस्पतिस्तोत्रम ॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

बृहस्पति स्तोत्र | Brihaspati Stotra

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।