ब्रह्मानंद स्वामी

पारंपरिक
विष्णु भगवान संत साहित्य Bhakt Brahmanand Swami Bhakt
॥ पावन पाठ ॥

भक्तमालः ब्रह्मानन्द स्वामी

असली नाम- लडुदानजी

अन्य नाम - श्रीरंगदासजी

गुरु - स्वामीनारायण भगवान

आराध्य - स्वामीनारायण सम्प्रदाय

जन्म - 12 फ़रवरी 1772 (वसंत पंचमी)

जन्म स्थान - खान गांव, सिरोही, माउंट आबू

वैवाहिक स्थिति - अविवाहित

भाषा - डिंगल, संस्कृत, गुजराती

पिता - शम्भुदानजी आशिया

माता - ललुबा

प्रसिद्ध - स्वामीनारायण संप्रदाय के अंतर्गत अष्ट कवि

उल्लेखनीय कृति - 'ब्रह्मानंद काव्य'

ब्रह्मानंद स्वामी स्वामीनारायण संप्रदाय के संत और स्वामीनारायण भगवान के परमहंस में से एक के रूप में प्रतिष्ठित थे। स्वामीनारायण संप्रदाय में उन्हें स्वामीनारायण के आठ कवियों में से एक के रूप में भी जाना जाता है। स्वामीनारायण संप्रदाय के ग्रंथों में उल्लेख है कि स्वामीनारायण ने ब्रह्मानंद स्वामी को ब्रह्मा का अवतार बताया था।

वह एक महान कवि थे. मुली, वडताल, जूनागढ़ आदि में महान मंदिरों के निर्माण के अलावा, ब्रह्मानंद स्वामी ने हिंदी और गुजराती में कई ग्रंथ लिखे। 'ब्रह्मानंद काव्य' उनकी रचनाओं का संग्रह है, जिसकी एक प्रति लंदन के ब्रिटिश संग्रहालय में संरक्षित है।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

ब्रह्मानंद स्वामी | Brahmanand Swami

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।