बोलो जय जयकारे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Maa Durga Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

ऊँचे ऊँचे भवनों बैठी रुप अनेकों धारे,

चरण चाकरी कर लो भैया,

हो जाए वारे न्यारे,

बोलो जय जयकारे,

माँ के बोलो जय जयकारे ॥

शेर पर मैया चढ़ी चढ़ी,

ज्योति सवाई बड़ी बड़ी,

आने वाली है मेरी,

माई आने वाली है,

लाल चुनरिया जड़ी जड़ी,

देखी दुनिया खड़ी खड़ी,

शेरोवाली मैहरोवाली,

माई लाटावाली है,

कलकत्ते काली,

जोतावाली माता ज्वाला,

जम्मू में माता वैष्णो वाली है,

विंध्यवासिनी विंध्याचल की,

गुवाहाटी कामाख्या,

मनसा माता नैना देवी,

शैलसुता माँ साख्या,

बोलो जय जयकारे,

माँ के बोलो जय जयकारे ॥

दयालु बड़ी माँ दयालु बड़ी,

माता करुणामयी कंजका माँ,

सबकी झोली भरे सारे संकट हरे,

माई जगदम्बिके अंबिके माँ,

‘लहरी’ न जाने क्या बखाने,

यही माने मनसा माँ,

मंशा पुरने वाली है,

जिस घर होवे पूजा माँ की,

खुशियां खुशियां बरसे,

आज तलक खाली ना लौटा,

कोई माँ के दर से,

बोलो जय जयकारे,

माँ के बोलो जय जयकारे ॥

ऊँचे ऊँचे भवनों बैठी रुप अनेकों धारे,

चरण चाकरी कर लो भैया,

हो जाए वारे न्यारे,

बोलो जय जयकारे,

माँ के बोलो जय जयकारे ॥

दुर्गा चालीसा | आरती: जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी | आरती: अम्बे तू है जगदम्बे काली | महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम् | माता के भजन

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।