बिसर गई सब तात पराई - शब्द कीर्तन

गुरु नानक देव जी
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॥ पावन पाठ ॥

बिसर गई सब तात पराई,

जब ते साध संगत मोहे पाई,

ना कोई बैरी नहीं बेगाना,

सगल संग हमको बन आई,

बिसर गई सब तात पराई,

बिसर गयी सब तात पराई ।

जो प्रभु कीन्हो सो भल मान्यो,

एह सुमत साधु ते पाई,

बिसर गई सब तात पराई,

बिसर गयी सब तात पराई ।

सब में रव रहिया प्रभु एको,

पेख पेख नानक बिगसाई,

बिसर गई सब तात पराई,

बिसर गयी सब तात पराई ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।