भोले तेरी नगरी में दिल मेरा खो जाए

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

ॐ नमः शिवाय… ॐ नमः शिवाय…

गूँजे ये संसार में… हर हर महादेव…

भोले तेरी नगरी में, दिल मेरा खो जाए

भोले तेरी नगरी में, दिल मेरा खो जाए

भोले तेरी नगरी में, दिल मेरा खो जाए

डमरू की हर धुन पे, सांस मेरी हो जाए

तेरा नाम जपूँ तो, समय भी थम जाए

हर हर महादेव बोले, जग सारा झूम जाए

भोले तेरी नगरी में, दिल मेरा खो जाए

डमरू की हर धुन पे, सांस मेरी हो जाए

भोले तेरी नगरी में, दिल मेरा खो जाए

भोले तेरी नगरी में, दिल मेरा खो जाए

राख सी दुनिया में, तू ही उजियारा है

तेरी जटा से बहता, जीवन धारा है

राख सी दुनिया में, तू ही उजियारा है

तेरी जटा से बहता, जीवन धारा है

सूने से इस दिल को, तेरा सहारा है

तेरी ही छाया में, हर दर्द हमारा है

भोले तेरी नगरी में, दिल मेरा खो जाए

डमरू की हर धुन पे, सांस मेरी हो जाए

तेरा नाम जपूँ तो, समय भी थम जाए

हर हर महादेव बोले, जग सारा झूम जाए

भोले तेरी नगरी में, दिल मेरा खो जाए

भोले तेरी नगरी में, दिल मेरा खो जाए

खामोशी में भी तू, सब कुछ कह जाता

टूटे हुए दिल को, हँसना सिखा जाता

खामोशी में भी तू, सब कुछ कह जाता

टूटे हुए दिल को, हँसना सिखा जाता

तेरे दर पे आके, हर डर मिट जाता

तेरी कृपा से ही, जीवन सँवर जाता

भोले तेरी नगरी में, दिल मेरा खो जाए

डमरू की हर धुन पे, सांस मेरी हो जाए

तेरा नाम जपूँ तो, समय भी थम जाए

हर हर महादेव बोले, जग सारा झूम जाए

भोले तेरी नगरी में, दिल मेरा खो जाए

भोले तेरी नगरी में, दिल मेरा खो जाए

अँधेरों की रातों में, तू दीप जलाता

भटके हुए राही को, राह दिखाता

अँधेरों की रातों में, तू दीप जलाता

भटके हुए राही को, राह दिखाता

एक तेरी झलक से, भाग्य बदल जाए

तेरे ही नाम से, हर संकट टल जाए

भोले तेरी नगरी में, दिल मेरा खो जाए

डमरू की हर धुन पे, सांस मेरी हो जाए

तेरा नाम जपूँ तो, समय भी थम जाए

हर हर महादेव बोले, जग सारा झूम जाए

भोले तेरी नगरी में, दिल मेरा खो जाए

डमरू की हर धुन पे, सांस मेरी हो जाए

तेरा नाम जपूँ तो, समय भी थम जाए

हर हर महादेव बोले, जग सारा झूम जाए

भोले तेरी नगरी में, दिल मेरा खो जाए

भोले तेरी नगरी में, दिल मेरा खो जाए

भोले तेरी नगरी में, दिल मेरा खो जाए

भोले तेरी नगरी में, दिल मेरा खो जाए

भोले तेरी नगरी में, दिल मेरा खो जाए

भोले तेरी नगरी में, दिल मेरा खो जाए

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।