भोले शिव मंगलकारी, भोले की महिमा न्यारी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

भोले शिव मंगलकारी,

भोले की महिमा न्यारी,

भोले की भक्ति कर लो,

भोले को भक्ति प्यारी,

भोले को ध्यान में धरके,

निकलेगा जो मंदिर से,

भोले हर लेंगे उसकी,

पीड़ा ही सारी,

भोलें शिव मंगलकारी,

भोले की महिमा न्यारी ॥

खुद विष पी अमृत को त्यागे,

ऐसा कौन निराला जग में,

ऐसा कौन निराला,

भस्मासुर पे खुश हो के,

मनचाहा वर दे डाला,

जग में ऐसा कौन निराला,

वो है भोला मेरा

वो है गंगाधरा,

आधा वो नर बन जाए,

आधा वो नारी,

भोलें शिव मंगलकारी,

भोले की महिमा न्यारी ॥

चाहे चढ़ाओ बिल्वपत्र या,

चाहे फूल चढ़ाओ,

वो तो भावों का है भूखा,

पकवानो का भोग लगाओ,

चाहे भांग धतूरा,

चाहे रख दो रुखा सूखा,

प्रेम से जो भी दो,

भावों से जो भी दो,

सबके मन की रखता है,

भोला भंडारी,

भोलें शिव मंगलकारी,

भोले की महिमा न्यारी ॥

जो मस्तक पे गंगा धारे,

उसपे जल की धारा,

कैसी लीला उसकी न्यारी,

जिसको पूजे सुरनर मुनिजन,

रावण को जो प्यारा,

वो है शिव शंकर त्रिपुरारी,

उसके नाम अनेक,

उसके रूप अनेक,

कृष्णा भी पूजे पूजे,

अवध बिहारी,

भोलें शिव मंगलकारी,

भोले की महिमा न्यारी ॥

भोले शिव मंगलकारी,

भोले की महिमा न्यारी,

भोले की भक्ति कर लो,

भोले को भक्ति प्यारी,

भोले को ध्यान में धरके,

निकलेगा जो मंदिर से,

भोले हर लेंगे उसकी,

पीड़ा ही सारी,

भोलें शिव मंगलकारी,

॥ दोहा ॥

भोले की महिमा न्यारी ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।