भोले को कैसे मनाऊ रे: शिव भजन

पारंपरिक
महादेव भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

भोले को कैसे मनाऊ रे,

भोले को कैसे मनाऊ रे,

ओ मेरा भोला ना माने,

भोला ना माने मेरा शंकर ना माने,

तुझपे मैं वारी वारी जाउ रे,

मेरा भोला ना माने ॥

बाली उमर से तुम्हारी भक्ति कारी है,

कहते हैं शिव जी मैं शक्ति बसी है,

बाली उमर से तुम्हारी भक्ति कारी है,

कहते हैं शिव जी मैं शक्ति बसी है,

तेरा ही हुकम बजाउ रे,

मेरा भोला ना माने,

भोला ना माने मेरा शंकर ना माने,

भोला ना माने मेरा शंकर ना माने,

भोले को कैसे मनाऊ रे,

मेरा भोला ना माने ॥

का देके शिव का मनाई हो शिव मानत नहीं,

का देके शिव का मनाई हो शिव मानत नहीं,

मानत नहीं शिव मानत नहीं,

मानत नहीं भोला मानत नहीं,

का देके,

का देके,

का देके शिव का मनाई हो शिव मानत नहीं,

का देके शिव का मनाई हो शिव मानत नहीं ॥

SantoKiVani Lyrics

रूठो ना हमसे एसे ओ दीनानाथी,

दासी हूं चरनो की मैं ही जीवनसाथी,

रूठो ना हमसे एसे ओ दीनानाथी,

दासी हूं चरनो की मैं ही जीवनसाथी,

तुझ बिन मैं मार जाउ रे,

छोड तुझे ना जाउ रे,

ओह मेरी गौरा दीवानी,

गौरा दीवानी मेरी गौरा दीवानी,

गौरा दीवानी मेरी गौरा दीवानी,

भोले को कैसे मनाऊ रे,

छोड तुझे ना जाउ रे,

ओह मेरी गौरा दीवानी,

ओ मेरा भोला ना माने,

ओह मेरी गौरा दीवानी,

॥ दोहा ॥

ओ मेरा भोला ना माने ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।