भोले के दर से सबकुछ मिला

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shiv Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

मुकद्दर मेरा बन ही गया,

भोले के दर से सबकुछ मिला,

मन का अँधेरा मिट सा गया,

भोलें के दर से सबकुछ मिला ॥

नाग गले में माथे पे चंदा,

श्रृंगार भसम का जटा में गंगा,

पीके विष का प्याला नीलकंठ भया,

भोलें के दर से सबकुछ मिला,

मन का अँधेरा मिट सा गया,

भोलें के दर से सबकुछ मिला ॥

दुनिया से हारा वक्त का मारा,

भोले बाबा ने मुझको उबारा,

टूटी थी कश्ती किनारा दिया,

भोलें के दर से सबकुछ मिला,

मन का अँधेरा मिट सा गया,

भोलें के दर से सबकुछ मिला ॥

दीनदयाल वो दुःख है हरता,

मन की मुरादें पूरी है करता,

नाम प्रभु का जिसने लिया,

उसको भोले ने सबकुछ दिया,

मुकद्दर मेरा बन ही गया,

भोलें के दर से सबकुछ मिला ॥

मुकद्दर मेरा बन ही गया,

भोले के दर से सबकुछ मिला,

मन का अँधेरा मिट सा गया,

॥ दोहा ॥

भोलें के दर से सबकुछ मिला ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।