शिव भो शंम्भो शिव शम्भो स्वयंभो

पारंपरिक
महादेव मंत्र Mantra Nirvana Mantra
॥ पावन पाठ ॥

शिव भो शंम्भो शिव शम्भो स्वयंभो

भो शम्भो शिव शम्भो स्वयंभो

गङ्गाधर शंकर करुणाकर मामव भवसागर तारक

निर्गुण परब्रह्म स्वरुप गमगम भूत प्रपञ्चा रहित

निज गुहानिहित नितान्त अनन्त आनन्द अतिशय अक्सयलिङ्ग

धिमित धिमित धिमि धिमिकित किततों तों तों तरिकित तरिकितकित तों

मातङ्ग मुनिवर वन्दिता इष सर्व दिगंबर वेस्तित

वेस इष सबेष नित्य निरञ्जन नित्य न अतेष इष सबेष सर्वेश

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।