भीगी पलकों तले, सहमी ख्वाहिश पले

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

भीगी पलकों तले,

सहमी ख्वाहिश पले,

मंजिले लापता,

श्याम कैसे चलें,

ऐसे में सांवरे,

तू बता क्या करे,

घाव अब भी हरा,

जाने कैसे भरे,

भीगी पलको तले,

सहमी ख्वाहिश पले ॥

देती ही रहती है,

दर्द ये दिल्लगी,

जाना अब सांवरे,

क्या है ये जिंदगी,

जिंदगी वो नदी,

ऊँची लहरों भरी,

तैरने का हमें,

कुछ तजुर्बा नहीं,

कुछ तजुर्बा नहीं,

पहुंचा पानी गले,

ना किनारा मिले,

मंजिले लापता,

श्याम कैसे चलें,

भीगी पलको तले,

सहमी ख्वाहिश पले ॥

हाल बेहाल है,

आँखों में है नमी,

वक़्त भागे बड़ा,

हसरते है थमी,

राहते कुछ नहीं,

आजमाती कमी,

सूखे अरमानो की,

टूटी फूटी ज़मी,

करदे तू एक नजर,

तृप्त वर्षा पड़े,

मंजिले लापता,

श्याम कैसे चलें,

भीगी पलको तले,

सहमी ख्वाहिश पले ॥

दास की देव की,

किस की तोहीन है,

भक्त की ये दशा,

क्यों वो गमगीन है,

भड़ते मेरे कदम,

पर दशा हीन है,

पूछते है पता,

वो कहाँ लीन है,

हाल पे कदमो का,

जोर भी ना चले,

मंजिले लापता,

श्याम कैसे चलें,

भीगी पलको तले,

सहमी ख्वाहिश पले ॥

हो गई है खता,

तो सजा दीजिये,

प्रेम से प्रेम की,

पर सुलह कीजिए,

मौन अब ना रहे,

कुछ बता दीजिए,

छुपती मुझसे ख़ुशी,

का अब पता दीजिए,

ढूंढे ‘निर्मल’ तुझे,

अब लगा लो गले,

मंजिले लापता,

श्याम कैसे चलें,

भीगी पलको तले,

सहमी ख्वाहिश पले ॥

भीगी पलकों तले,

सहमी ख्वाहिश पले,

मंजिले लापता,

श्याम कैसे चलें,

ऐसे में सांवरे,

तू बता क्या करे,

घाव अब भी हरा,

जाने कैसे भरे,

भीगी पलको तले,

सहमी ख्वाहिश पले ॥

आरती कुंजबिहारी की | आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन | श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं | आरती श्री बाल कृष्ण जी की | ॐ जय जगदीश हरे | मधुराष्टकम्: धरं मधुरं वदनं मधुरं | कृष्ण भजन | अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं | श्री कृष्णा गोविन्द हरे मुरारी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।