भवानी मुझें दर पे बुलाती रहियो

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Maa Durga Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

भवानी मुझे दर पे बुलाती रहियो,

मैया जी मुझे दर पे बुलाती रहियो,

भवानी मुझें दर पे बुलाती रहियो ॥

ये दुनिया एक भूल भुलैया,

चलना मुझे नहीं आए मैया,

आगे आगे मेरे चलकर,

आगे आगे मेरे चलकर,

राह दिखाती रहियो,

मैया जी मुझे दर पे बुलाती रहियो,

भवानी मुझें दर पे बुलाती रहियो ॥

तू तो है बिगड़ी बनाने वाली,

सबकी भूल भुलाने वाली,

भूल कोई हो जाए मुझसे,

उसको भुलाती रहियो,

मैया जी मुझे दर पे बुलाती रहियो,

भवानी मुझें दर पे बुलाती रहियो ॥

पाप पुण्य मेरे मत देखो,

केवल अपनी शरण में लेलो,

अबतक किरपा जैसे लुटाई,

अबतक किरपा जैसे लुटाई,

वैसे लुटाती रहियो,

मैया जी मुझे दर पे बुलाती रहियो,

भवानी मुझें दर पे बुलाती रहियो ॥

जानता है ये तो जग सारा,

‘रामकुमार लख्खा’ है तुम्हारा,

कभी कभी ‘शर्मा’ के घर पर,

कभी कभी ‘शर्मा’ के घर पर,

भी तू आती रहियो,

मैया जी मुझे दर पे बुलाती रहियो,

भवानी मुझें दर पे बुलाती रहियो ॥

भवानी मुझे दर पे बुलाती रहियो,

मैया जी मुझे दर पे बुलाती रहियो,

भवानी मुझें दर पे बुलाती रहियो ॥

दुर्गा चालीसा | आरती: जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी | आरती: अम्बे तू है जगदम्बे काली | महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम् | माता के भजन

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।