भाव सुमन लेकर मैं बैठा, गौरी सुत स्वीकार करो

पारंपरिक
श्री गणेश भजन Bhajan Vighneswaray Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

भाव सुमन लेकर मैं बैठा,

गौरी सुत स्वीकार करो,

हे गणनायक शुभ वरदायक,

हे गणनायक शुभ वरदायक,

आकर सिर पर हाथ धरो,

भाव सुमन लेकर मै बैठा,

गौरी सुत स्वीकार करो ॥

विद्यावारिधि बुद्धिविधाता,

आप दया के सागर हो,

भक्तों के दुःख हरने वाले,

ना तुमसे करुणाकर हो,

रिद्धि सिद्धि के देने वाले,

हम पर भी उपकार करो,

भाव सुमन लेकर मै बैठा,

गौरी सुत स्वीकार करो ॥

लम्बोदर गजवदन विनायक,

विघ्न हरण कर लो सारे,

मोदक प्रिय मुदमंगल त्राता,

दुःख दारिद्र हरने वाले,

लाज तुम्हारे हाथ गजानन,

भव से बेड़ा पार करो,

भाव सुमन लेकर मै बैठा,

गौरी सुत स्वीकार करो ॥

‘आलूसिंह’ तेरी महिमा का,

पार नहीं कोई पाया,

त्रास हरो सांवल की सारी,

द्वार आपके ये आया,

दास तुम्हारे श्री चरणों का,

हम सबके भंडार भरो,

भाव सुमन लेकर मै बैठा,

गौरी सुत स्वीकार करो ॥

भाव सुमन लेकर मैं बैठा,

गौरी सुत स्वीकार करो,

हे गणनायक शुभ वरदायक,

हे गणनायक शुभ वरदायक,

आकर सिर पर हाथ धरो,

भाव सुमन लेकर मै बैठा,

॥ दोहा ॥

गौरी सुत स्वीकार करो ॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

भजन: भाव सुमन लेकर मैं बैठा, गौरी सुत स्वीकार करो | Bhajan: Bhav Suman Lekar Main Baitha Gaurisut Swikar Karo Lyrics Hindi Aur English Main

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।