भटकूं क्यों मैं भला, संग मेरे है सांवरा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

भटकूं क्यों मैं भला,

संग मेरे है सांवरा,

जब तूफानों ने रुलाया,

लिले चढ़कर श्याम आया,

मुस्कुरा कर मुझसे बोला,

मैं तेरा हूँ मैं तेरा,

भटकूँ क्यों मैं भला,

संग मेरे है सांवरा ॥

श्याम जबसे है मिला,

फुल मधुबन का खिला,

लाख पतझड़ सर खड़ा था,

मैं बहारों में पला,

जब कभी मैं लडखडाया,

साया बनकर श्याम आया,

सर पे रख के हाथ बोला,

मैं तेरा हूँ मैं तेरा,

भटकूँ क्यों मैं भला,

संग मेरे है सांवरा ॥

जिंदगी वीरान थी,

हर गली सुनसान थी,

श्याम के चलते ही मुझको,

दुनिया अब पहचानती,

दीप खुशियों का जलाया,

चरणों में अपने बैठाया,

ले शरण फिर श्याम बोला,

मैं तेरा हूँ मैं तेरा,

भटकूँ क्यों मैं भला,

संग मेरे है सांवरा ॥

सांसे मेरी श्याम से,

श्याम ही मेरा जहान,

रिश्ते दुनिया में बहुत है,

श्याम सा रिश्ता कहाँ,

बनके बाबुल श्याम आया,

कंधे से कन्धा मिलाया,

सर झुकाकर मैं बोला,

तू मेरा बस तू मेरा,

भटकूँ क्यों मैं भला,

संग मेरे है सांवरा ॥

भटकूं क्यों मैं भला,

संग मेरे है सांवरा,

जब तूफानों ने रुलाया,

लिले चढ़कर श्याम आया,

मुस्कुरा कर मुझसे बोला,

मैं तेरा हूँ मैं तेरा,

भटकूँ क्यों मैं भला,

॥ दोहा ॥

संग मेरे है सांवरा ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।