भक्तिसिद्धांत सरस्वती

पारंपरिक
श्री कृष्ण संत साहित्य Bhakt Bhaktisiddhanta Sarasvati Bhakt
॥ पावन पाठ ॥

भक्तमाल: भक्तिसिद्धांत सरस्वती

असली नाम - बिमला प्रसाद दत्ता

अन्य नाम - श्रील भक्तिसिद्धान्त सरस्वती गोस्वामी प्रभुपाद

शिष्य - ए. सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद

गुरु - गौराकिसोरा दास बाबाजी

आराध्य - भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु

जन्म - 6 फ़रवरी 1874

जन्म स्थान - पुरी, ओडिशा, भारत

निधन - 1 जनवरी 1937 (उम्र 62 वर्ष), कोलकाता

वैवाहिक स्थिति - अविवाहित

भाषा - उड़िया, बंगाली, हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी

पिता - केदारनाथ दत्त (भक्तिविनोद ठाकुर)

माता - भगवती देवी

स्थापित संगठन: गौड़ीय मठ, गौड़ीय मिशन

प्रसिद्ध - गौड़ीय वैष्णव हिंदू गुरु

श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती प्रभुपाद, गौड़ीय मिशन के संस्थापक और अपने गुरु-पिता श्रील भक्तिविनोद ठाकुर के सबसे प्रतिष्ठित अनुयायी थे। भक्तिसिद्धांत सरस्वती 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत में पूरे भारत में गौड़ीय वैष्णववाद के अत्यधिक प्रभावशाली प्रचारक थे। वह ए. सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद के आध्यात्मिक गुरु थे।

उन्होंने अपने शिष्य ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद को कृष्ण चेतना सिखाने के लिए पश्चिम जाने के लिए कहा। श्रील प्रभुपाद 1965 में न्यूयॉर्क गए और अपने आध्यात्मिक गुरु के मिशन को बड़े पैमाने पर आगे बढ़ाया। भक्तिसिद्धांत सरस्वती ने विद्वानों, शिक्षकों और अन्य नेताओं से मुलाकात की और भक्ति को एक आस्तिक विज्ञान के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास करते हुए 108 से अधिक निबंध और किताबें लिखीं। उन्होंने भारत के अंदर और बाहर 64 मंदिरों की स्थापना की, जिन्हें गौड़ीय मठ के नाम से जाना जाता है।

अपने अंतिम दिन उन्होंने मायापुर में बिताए, श्री सिद्धांत सरस्वती ने एक घास की झोपड़ी का निर्माण किया, जहाँ वे बहुत सादगी से रहते थे और दिन-रात जप करते थे।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

भक्तिसिद्धांत सरस्वती | Bhaktisiddhanta Sarasvati

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।