भक्ति चारु स्वामी

पारंपरिक
श्री कृष्ण संत साहित्य Bhakt Bhakti Charu Swami Bhakt
॥ पावन पाठ ॥

भक्तमालः भक्ति चारु स्वामी

अन्य नाम - चारु स्वामी महाराज

आराध्य - भगवान कृष्ण

गुरु - ए. सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद

जन्म - 17 सितम्बर 1945

स्थान - कुटी, बांग्लादेश

निधन - 4 जुलाई 2020, फ्लोरिडा, संयुक्त राज्य अमेरिका

शिक्षा - उत्तरी बंगाल विश्वविद्यालय

दीक्षा - हरिनाम, ब्राह्मण और संन्यास दीक्षा

वैवाहिक स्थिति - अविवाहित

भाषा - संस्कृत, अंग्रेजी, हिंदी, बंगाली

प्रसिद्ध - इस्कॉन गुरु, गवर्निंग बॉडी कमीशन के सदस्य

भक्ति चारु स्वामी इस्कॉन के एक भारतीय आध्यात्मिक नेता थे। वह इस्कॉन के संस्थापक ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद के शिष्य भी थे। महाराज को वैष्णव व्यवहार में उनकी विशेषज्ञता, उनके विशाल ज्ञान और श्रील प्रभुपाद और इस्कॉन के प्रति उनके समर्पण के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाना जाता है।

श्रील प्रभुपाद द्वारा लिखित द नेक्टर ऑफ डिवोशन को पढ़ने के बाद, स्वामी भारत के पश्चिम बंगाल के मायापुर में इस्कॉन में शामिल हो गए। श्रील प्रभुपाद से उनकी पहली मुलाकात जनवरी 1977 में प्रयागराज में 'महा' कुंभ मेले के दौरान हुई थी। श्रील प्रभुपाद ने उन्हें अपनी सभी पुस्तकों का बंगाली में अनुवाद करने और भारतीय मामलों के लिए उनके सचिव बनने का निर्देश दिया।

महाराज जी भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, मध्य पूर्व और ऑस्ट्रेलिया में यात्रा करते हैं और आध्यात्मिक रिट्रीट और सेमिनार आयोजित करते थे। भक्ति चारु स्वामी ने कई अवसरों पर नेतृत्व, सामुदायिक निर्माण और रिश्तों को मजबूत करने के क्षेत्र में अपनी महारत और विशेषज्ञता प्रदर्शित की है। उन्होंने दुनिया के शीर्ष प्रबंधन और इंजीनियरिंग संस्थानों यानी एमआईटी, आईआईएम और आईआईटी में मुख्य वक्ता के रूप में प्रस्तुतियाँ दी हैं।

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

भक्ति चारु स्वामी | Bhakti Charu Swami

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।