भजहु रे मन श्री नंद नंदन

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन Bhajan Shri Krishna Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

भजहु रे मन श्री नंद नंदन

अभय-चरणार्विन्द रे

दुर्लभ मानव-जन्म सत-संगे

तारो ए भव-सिंधु रे

भजहु रे मन श्री नंद नंदन

अभय-चरणार्विन्द रे

शीत तप बात बरिशन

ए दिन जामिन जगी रे

बिफले सेविनु कृपन दुरजन

चपल सुख लभ लागी रे

भजहु रे मन श्री नंद नंदन

अभय-चरणार्विन्द रे

ए धन यौवन पुत्र परिजन

इथे की आचे पारतित रे

कमल-दल-जल, जीवन तलमल

भजू हरि-पद नीत रे

भजहु रे मन श्री नंद नंदन

अभय-चरणार्विन्द रे

श्रवण कीर्तन स्मरण वंदन

पद सेवन दास्य रे

पूजन, सखी-जन, आत्म-निवेदन

गोविंद-दास-अभिलाषा रे

भजहु रे मन श्री नंद नंदन

अभय-चरणार्विन्द रे

दुर्लभ मानव-जन्म सत-संगे

तारो ए भव-सिंधु रे

भक्ति-भारत सभी भक्तों के लिए भगवान कृष्ण का यह प्रसिद्ध भजन प्रस्तुत कर रहा है। आइये अपनी दैनिक दिनचर्या में भजनों को सम्मलित करें।

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।