भगवती स्तोत्र

पारंपरिक
श्री राम स्तोत्र Mantra Bhagwati Stotra Mantra
॥ पावन पाठ ॥

जय भगवति देवि नमो वरदे

जय पापविनाशिनि बहुफलदे।

जय शुम्भनिशुम्भकपालधरे

प्रणमामि तु देवि नरार्तिहरे॥1॥

जय चन्द्रदिवाकरनेत्रधरे

जय पावकभूषितवक्त्रवरे।

जय भैरवदेहनिलीनपरे

जय अन्धकदैत्यविशोषकरे॥2॥

जय महिषविमर्दिनि शूलकरे

जय लोकसमस्तकपापहरे।

जय देवि पितामहविष्णुनते

जय भास्करशक्रशिरोवनते॥3॥

जय षण्मुखसायुधईशनुते

जय सागरगामिनि शम्भुनुते।

जय दु:खदरिद्रविनाशकरे

जय पुत्रकलत्रविवृद्धिकरे॥4॥

जय देवि समस्तशरीरधरे

जय नाकविदर्शिनि दु:खहरे।

जय व्याधिविनाशिनि मोक्ष करे

जय वाञ्िछतदायिनि सिद्धिवरे॥5॥

एतद्व्यासकृतं स्तोत्रं य:

पठेन्नियत: शुचि:।

गृहे वा शुद्धभावेन

॥ दोहा ॥

प्रीता भगवती सदा॥6॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।