भगवान बुद्ध वन्दना

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन Bhajan Buddha Bhajan
॥ पावन पाठ ॥

बुद्ध पूर्णिमा के साथ-साथ भीमराव अंबेडकर जयंती (14 अप्रैल) के दिन यह भगवान बुद्ध वन्दना जन-साधारण के बीच अत्यधिक लोकप्रिय है।

बुद्ध वन्दना

नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मा सम्बुद्धस्स ।

नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मा सम्बुद्धस्स ।

नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मा सम्बुद्धस्स ।

त्रिशरण

बुद्धं शरणं गच्छामि ।

धर्मं शरणं गच्छामि ।

संघं शरणं गच्छामि ।

दुतियम्पि बुद्धं सरणं गच्छामि ।

दुतियम्पि धम्म सरणं गच्छामि ।

दुतियम्पि संघ सरणं गच्छामि ।

ततियम्पि बुद्धं सरणं गच्छामि ।

ततियम्पि धम्म सरणं गच्छामि ।

ततियम्पि संघ सरणं गच्छामि ।

पंचशील

1. पाणतिपाता वेरमणी सिक्खापदं समादियामि ।

2. अदिन्नादाना वेरमणी सिक्खापदं समादियामि ।

3. कामेसु मिच्छाचारा वेरमणी सिक्खापदं समादियामि ।

4. मुसावादा वेरमणी सिक्खापदं समादियामि ।

5. सुरा-मेरय-मज्ज-पमादट्ठानावेरमणी सिक्खापदं समादियामि ।

॥ भवतु सर्व मंगलं ॥

॥ दोहा ॥

साधू साधू साधू॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।