भगवा ध्वज है त्याग का, तप और तेज प्रतीक।
सत्य सनातन धर्म की, यही पुरातन लीक॥
भगवा रंग लहराएंगे, सनातन धर्म बढ़ाएंगे।
राम लला के चरणों में, हम शीश झुकाएंगे॥
भगवा रंग लहराएंगे॥
यह ध्वज सूर्य का तेज लिए है, त्याग का संदेश लिए है।
ऋषि मुनियों की तपस्या का, पावन ये विशेष दिए है॥
सत्य और न्याय की राह पे, कदम बढ़ाएंगे।
भगवा रंग लहराएंगे॥
राम राज का सपना जो, संतों ने देखा था।
वही सवेरा आ गया, बदली अब रेखा था॥
घर-घर में अब श्री राम की, अलख जगाएंगे।
भगवा रंग लहराएंगे॥
कन्हैया मित्तल गाए गीत, धर्म की शान में।
एकता का भाव जगे, सारे हिन्दुस्तान में॥
भगवा रंग लहराएंगे, सनातन धर्म बढ़ाएंगे॥
धर्म की जय होवे सदा, अधर्म का होवे नाश।
कन्हैया मित्तल विनवे, पूरण होवे आस॥