भगवा रंग लहराएंगे (सनातन का सम्मान)

कन्हैया मित्तल
श्री राम भजन भजन कन्हैया मित्तल
॥ दोहा ॥

भगवा ध्वज है त्याग का, तप और तेज प्रतीक।
सत्य सनातन धर्म की, यही पुरातन लीक॥

॥ चौपाई ॥

भगवा रंग लहराएंगे, सनातन धर्म बढ़ाएंगे।
राम लला के चरणों में, हम शीश झुकाएंगे॥
भगवा रंग लहराएंगे॥

यह ध्वज सूर्य का तेज लिए है, त्याग का संदेश लिए है।
ऋषि मुनियों की तपस्या का, पावन ये विशेष दिए है॥
सत्य और न्याय की राह पे, कदम बढ़ाएंगे।
भगवा रंग लहराएंगे॥

राम राज का सपना जो, संतों ने देखा था।
वही सवेरा आ गया, बदली अब रेखा था॥
घर-घर में अब श्री राम की, अलख जगाएंगे।
भगवा रंग लहराएंगे॥

कन्हैया मित्तल गाए गीत, धर्म की शान में।
एकता का भाव जगे, सारे हिन्दुस्तान में॥
भगवा रंग लहराएंगे, सनातन धर्म बढ़ाएंगे॥

॥ दोहा ॥

धर्म की जय होवे सदा, अधर्म का होवे नाश।
कन्हैया मित्तल विनवे, पूरण होवे आस॥

सरल हिंदी भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व

सनातन संस्कृति, भगवा ध्वज के त्याग और तपस्या के गौरव तथा भगवान श्री राम के आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने का ओजपूर्ण भजन।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।