श्री सत्यसायि अष्टोत्तर शतनामावलि (108 Names of Bhagawan Sathya Sai Baba: Ashtothram)

पारंपरिक
श्री राम मंत्र Mantra Sri Bhagawan Sathya Sai Baba Mantra
॥ पावन पाठ ॥

ओं श्री सायि सत्यसायिबाबाय नमः

ओं श्री सायि सत्यस्वरूपाय नमः

ओं श्री सायि सत्यधर्मपरायणाय नमः

ओं श्री सायि वरदाय नमः

ओं श्री सायि सत्पुरुषाय नमः

ओं श्री सायि सत्यगुणात्मने नमः

ओं श्री सायि साधुवर्धनाय नमः

ओं श्री सायि साधुजनपोषणाय नमः

ओं श्री सायि सर्वज्ञाय नमः

ओं श्री सायि सर्वजनप्रियाय नमः ॥ १० ॥

संतो की वाणी लिरिक्स

ओं श्री सायि सर्वशक्तिमूर्तये नमः

ओं श्री सायि सर्वेशाय नमः

ओं श्री सायि सर्वसङ्गपरित्यागिने नमः

ओं श्री सायि सर्वान्तर्यामिने नमः

ओं श्री सायि महिमात्मने नमः

ओं श्री सायि महेश्वरस्वरूपाय नमः

ओं श्री सायि पर्तिग्रामोद्भवाय नमः

ओं श्री सायि पर्तिक्षेत्रनिवासिने नमः

ओं श्री सायि यशःकायषिर्डीवासिने नमः

ओं श्री सायि जोडि आदिपल्लि सोमप्पाय नमः ॥ २० ॥

ओं श्री सायि भारद्वाजऋषिगोत्राय नमः

ओं श्री सायि भक्तवत्सलाय नमः

ओं श्री सायि अपान्तरात्मने नमः

ओं श्री सायि अवतारमूर्तये नमः

ओं श्री सायि सर्वभयनिवारिणे नमः

ओं श्री सायि आपस्तम्बसूत्राय नमः

ओं श्री सायि अभयप्रदाय नमः

ओं श्री सायि रत्नाकरवंशोद्भवाय नमः

ओं श्री सायि षिर्डी सायि अभेद शक्त्यावताराय नमः

ओं श्री सायि शङ्कराय नमः ॥ ३० ॥

ओं श्री सायि षिर्डी सायि मूर्तये नमः

ओं श्री सायि द्वारकामायिवासिने नमः

ओं श्री सायि चित्रावतीतट पुट्टपर्ति विहारिणे नमः

ओं श्री सायि शक्तिप्रदाय नमः

ओं श्री सायि शरणागतत्राणाय नमः

ओं श्री सायि आनन्दाय नमः

ओं श्री सायि आनन्ददाय नमः

ओं श्री सायि आर्तत्राणपरायणाय नमः

ओं श्री सायि अनाथनाथाय नमः

ओं श्री सायि असहाय सहायाय नमः ॥ ४० ॥

ओं श्री सायि लोकबान्धवाय नमः

ओं श्री सायि लोकरक्षापरायणाय नमः

ओं श्री सायि लोकनाथाय नमः

ओं श्री सायि दीनजनपोषणाय नमः

ओं श्री सायि मूर्तित्रयस्वरूपाय नमः

ओं श्री सायि मुक्तिप्रदाय नमः

ओं श्री सायि कलुषविदूराय नमः

ओं श्री सायि करुणाकराय नमः

ओं श्री सायि सर्वाधाराय नमः

ओं श्री सायि सर्वहृद्वासिने नमः ॥ ५० ॥

ओं श्री सायि पुण्यफलप्रदाय नमः

ओं श्री सायि सर्वपापक्षयकराय नमः

ओं श्री सायि सर्वरोगनिवारिणे नमः

ओं श्री सायि सर्वबाधाहराय नमः

ओं श्री सायि अनन्तनुतकर्तृणे नमः

ओं श्री सायि आदिपुरुषाय नमः

ओं श्री सायि आदिशक्तये नमः

ओं श्री सायि अपरूपशक्तिने नमः

ओं श्री सायि अव्यक्तरूपिणे नमः

ओं श्री सायि कामक्रोधध्वंसिने नमः ॥ ६० ॥

ओं श्री सायि कनकाम्बरधारिणे नमः

ओं श्री सायि अद्भुतचर्याय नमः

ओं श्री सायि आपद्बान्धवाय नमः

ओं श्री सायि प्रेमात्मने नमः

ओं श्री सायि प्रेममूर्तये नमः

ओं श्री सायि प्रेमप्रदाय नमः

ओं श्री सायि प्रियाय नमः

ओं श्री सायि भक्तप्रियाय नमः

ओं श्री सायि भक्तमन्दाराय नमः

ओं श्री सायि भक्तजनहृदयविहारिणे नमः ॥ ७० ॥

ओं श्री सायि भक्तजनहृदयालयाय नमः

ओं श्री सायि भक्तपराधीनाय नमः

ओं श्री सायि भक्तिज्ञानप्रदीपाय नमः

ओं श्री सायि भक्तिज्ञानप्रदाय नमः

ओं श्री सायि सुज्ञानमार्गदर्शकाय नमः

ओं श्री सायि ज्ञानस्वरूपाय नमः

ओं श्री सायि गीताबोधकाय नमः

ओं श्री सायि ज्ञानसिद्धिदाय नमः

ओं श्री सायि सुन्दररूपाय नमः

ओं श्री सायि पुण्यपुरुषाय नमः ॥ ८० ॥

ओं श्री सायि फलप्रदाय नमः

ओं श्री सायि पुरुषोत्तमाय नमः

ओं श्री सायि पुराणपुरुषाय नमः

ओं श्री सायि अतीताय नमः

ओं श्री सायि कालातीताय नमः

ओं श्री सायि सिद्धिरूपाय नमः

ओं श्री सायि सिद्धसङ्कल्पाय नमः

ओं श्री सायि आरोग्यप्रदाय नमः

ओं श्री सायि अन्नवस्त्रदायिने नमः

ओं श्री सायि संसारदुःख क्षयकराय नमः ॥ ९० ॥

ओं श्री सायि सर्वाभीष्टप्रदाय नमः

ओं श्री सायि कल्याणगुणाय नमः

ओं श्री सायि कर्मध्वंसिने नमः

ओं श्री सायि साधुमानसशोभिताय नमः

ओं श्री सायि सर्वमतसम्मताय नमः

ओं श्री सायि साधुमानसपरिशोधकाय नमः

ओं श्री सायि साधकानुग्रहवटवृक्षप्रतिष्ठापकाय नमः

ओं श्री सायि सकलसंशयहराय नमः

ओं श्री सायि सकलतत्त्वबोधकाय नमः

ओं श्री सायि योगीश्वराय नमः ॥ १००

ओं श्री सायि योगीन्द्रवन्दिताय नमः

ओं श्री सायि सर्वमङ्गलकराय नमः

ओं श्री सायि सर्वसिद्धिप्रदाय नमः

ओं श्री सायि आपन्निवारिणे नमः

ओं श्री सायि आर्तिहराय नमः

ओं श्री सायि शान्तमूर्तये नमः

ओं श्री सायि सुलभप्रसन्नाय नमः

ओं श्री सायि भगवान् सत्यसायिबाबाय नमः ॥ १०८ ॥

॥ दोहा ॥

इति श्री सत्यसायि अष्टोत्तर शतनामावलि ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।