बेटिया क्यों परायी हैं

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मुझे अपनी माँ से गिला, मिला ये ही सिला

बेटिया क्यों परायी हैं, मेरी माँ

खेली कूदी मैं जिस आँगन में,

वो भी अपना पराया सा लागे ।

ऐसा दस्तूर क्यों है माँ,

जोर किसका चला इसके आगे ।

एक को घर दिया, एक को वार दिया,

तेरी कैसी खुदाई है ॥

मुझे माँ से गिला...

जो भी माँगा मैंने बाबुल से,

दिया हस के मुझे बाबुल ने ।

प्यार इतना दिया है मुझको,

क्या बयान मैं करू अपने मुख से ।

जिस घर में पली, उस घर से ही माँ,

यह कैसी बिदाई है ॥

मुझे माँ से गिला...

अच्छा घर सुन्दर घर देखा माँ ने,

क्षण में कर दिया उनके हवाले ।

जिंदगी भर का यह है बंधन,

कह के समझाते हैं घर वाले ।

देते दिल से दुया, खुश रहना सदा,

कैसी प्रीत निभायी है ॥

मुझे माँ से गिला...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।