पेके हुंदे मावा नाल

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॥ पावन पाठ ॥

कब्रा विचो बोल नी माए,

दुख सुख धी नाल बोल नी माए,

आवा ता मै आवा नी माए,

आवा केडे चावा नाल,

मां में मुड़ नहियो पेके ओना,

पेके हूंदे मावा नाल,

मुंदया नालो वध के मैनू मां तू लाड लड़ाए सी,

मिश्री घोल घोल के मैनू कच्चे दूध पवाए सी,

पेका घर सी चंगा लगदा तेरिया मझिया गावा नाल,

मां मै मुड़ नहियों पेके ओना,

पेके हूंडे मावा नाल,

भाभियां नक फूल वटडिया ने ते वीरे दे वस लगदे ने,

बुड्ढे बाप दे अथरू माए अंदर अंदर वगदे ने,

अोही घर है अॊही वेडा कादा मान भरावा नाल,

मां मै मुड़ नहीयो पेके आेना,

पेके हंदे मावा नाल,

Singer- prince Bajaj पानीपत

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।