मेरी अम्बे भोली भाली है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरी अम्बे भोली भाली है,

यह मैया शक्तिशाली है,

मां जैसा कोई होए,

मां जैसा कोई वीर नहीं मां जैसा कोई धीर नहीं,

जब रण में मां का खड्ग चले,

तब धरती और आकाश हिले,

तब दसों दिशाएं होए,

तब दसों दिशायें हिलती हैं घनघोर हवाएं चलती हैं,

असुरों का नाश करें अम्बा,

धरती से पाप हरे अम्बा,

मां रूप निराले होए,

माँ रूप निराले धरती है और भार धरा का हरती है,

मधु कैटभ महिषासुर मारे,

माता ने भक्त सभी तारे,

भक्तों का बेड़ा होए

भक्तों का बेड़ा पार किया निर्भय सारा संसार किया,

है आदिशक्ति महारानी ये,

है जगदम्बा कल्याणी ये,

संसार बनाया होये,

संसार बनाया है इनका सब खेल रचाया है इनका

भजनकार मनोज कुमार

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।