आजा जोगियां वे तनु सोह मेरे प्यार दी

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॥ पावन पाठ ॥

आजा जोगियां वे तनु सोह मेरे प्यार दी,

तेरे दर्श दीदार नु माँ रत्नो पुकार दी,

आजा जोगियां वे तनु सोह मेरे प्यार दी,

मैं जद भी देखा चार चुफेरे तनु ही बस देखा,

हुन आया तू आया जोगियां पेंदा तेरा भुलेखा,

जंगला च घूम घूम तेरा राह निहार दी,

आजा जोगियां वे तनु सोह मेरे प्यार दी,

उडीक तेरी विच फकरा वे में फिरदी चलम चली

तेरे वाजो हो गई आ मैं बिलकुल कलम कली,

तेरे तो बिना मैं वांग मोया वक़्त गुजार दी ,

आजा जोगियां वे तनु सोह मेरे प्यार दी,

तेरे मुख चो इक वरि कण माँ सुनन नु तरसन,

प्रगट होके योगी ने फिर दिते माँ नु दर्शन,

छड़ दे तू मैनु कली न गल कर जान दी,

आजा जोगियां वे तनु सोह मेरे प्यार दी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।