मेरी माला के मोती

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॥ पावन पाठ ॥

मेरी माला के मोती बिखर गये,

बड़े चाव से मैंने बनाई थी,

मेरे अपने छुट गये साईं मैं जिनको अपना कहता था,

कई गाव दिये मुझे अपनों ने मैं जिनके दिल में रहता था,

मैं दर दर भटक ता फिरता हु,

मेरी मंजिल तुम हो साईं जी,

अब और कहा जाऊ साईं,

नही अपना कोई साईं जी,

मेरी माला के मोती .......

तिनका तिनका तुम चुन कर के छोटी सी कुटियाँ बनाई थी,

उस कुटियाँ में साईं बाबा तद प्रेम की ज्योत जलाई थी,

वो छुट गये जो थे अपने हर इक शेह लगती पराई थी

अब और कहा जाऊ साईं,

नही अपना कोई साईं जी,

मेरी माला के मोती .......

तेरी रहमत के चर्चे सुन कर,

मैं आ पोहंचा दरबार तेरे इक तेरे,

इक तेरे सिवा कोई भी नही जो हर ले साईं कष्ट मेरे,

अब और नही जाऊ गा कही,

शिरडी वाले मेरे साईं जी,

अब और कहा जाऊ साईं,

नही अपना कोई साईं जी,

मेरी माला के मोती .......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।