जो साई शरण में रहते हैं

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॥ पावन पाठ ॥

जो साई शरण में रहते हैं,

लोग उनको सता नही पाते है,

भरते है खुशियों से दामन,

जब साईं रहम फरमाते है,

जो साई शरण में रहते हैं

फरयाद में तेरी है देरी उनके आने में देर नही,

हो सकती है रात अंधरी दर साईं के अंधेर नही,

तूफ़ान में फसी हर नईया को मेरे साईं पार लगाते है,

जो साई शरण में रहते हैं

जो दुःख हरती है दुखियो की शिरडी में वो पावन ज्योति है,

तू देख वसा के दिल में उसे फिर बात खुदा से होती है,

दिल अपना जो साईं को दे बेठे वो साईं तेरे हो जाते है,

जो साई शरण में रहते हैं

बिन मांगे ही दे देते है साईं की शान निराली है,

कोई भक्त नही कह सकता यहा देखो मेरी झोली खाली है,

आते है जो गम के मारे यहा वो हस्ते हस्ते जाते है,

जो साई शरण में रहते हैं

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।