मधुबन के मंदिरो में भगवान बस रहा है

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॥ पावन पाठ ॥

मधुबन के मंदिरो में भगवान बस रहा है ।

पारस प्रभु के दर पे सोना बरस रहा है ॥

आध्यात्म का यह सोना पारस ने खुद दिया है,

ऋषिओं ने इस धरा से निर्वाण पद लिया है ।

सदिओं से इस शिखर का स्वर्णिम सुयश रहा है,

पारस प्रभु के दर पे सोना बरस रहा है ॥

मधुबन के मंदिरों में...

तीर्थंकरों के तप से पर्वत हुआ यह पावन,

केवल्य रश्मिओं का बरसा यहां सावन ।

उस ज्ञानामृत के जल से पर्वत सरस रहा है,

पारस प्रभु के दर पे सोना बरस रहा है ॥

मधुबन के मंदिरों में...

पर्वत के गर्भ में है रत्नो का है वो खजाना,

जब तक है चंन्द सूरज होगा नहीं पुराना ।

जन्मा है जैन कुल में तू क्यों तरस रहा है,

पारस प्रभु के दर पे सोना बरस रहा है ॥

मधुबन के मंदिरों में...

नागो को भी यह पारस राजेन्द्र सम बनाए,

उपसरग के समय जो धेन्द्र बन के आए ।

पारस के सर पे देवी पद्मावती यहाँ है,

पारस प्रभु के दर पे सोना बरस रहा है ॥

मधुबन के मंदिरों में...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।