भजन बिना हरी से मिलन न होये

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

भजन बिना हरी से मिलन न होये,

भयो दिन चल मंदिर कहे सोये,

ओ पगले पापो की गठरियाँ काहे मन पे धोये,

हरी सुमिरन की गंगा में क्यों मेल न मन का धोये,

चल मंदिर कहे सोये......

देख देख हाथो की लकीरे,

क्यों कर मन को रोये,

खुद अपनी राहो में तूने पेड़ बबुल के बोये,

चल मंदिर कहे सोये.....

क्यों अपनी तृष्णा में उलझ के भजन के मोती खोये,

झूठे सपने तू पलकन की डोर में काहे पिरोये,

चल मंदिर कहे सोये......

भजन बिना तेरी मुश्किल में काम न कोई,

इक दिन पगले ले डुभे गी तेरी मैं मैं तोहे,

चल मंदिर कहे सोये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।