मेरी कलिका मइयां मैनु तेरा सहारा है माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरी कलिका मइयां मैनु तेरा सहारा है माँ,

गुफा विच छावा विच ठंढियां हवावा विच तेरा ही नजारा है माँ,

मेरी मेरी कलिका मइया मैनु तेरा सहारा है माँ,

तू चावे ता पतझड़ विच भी फूल खिला सकदी है,

मौज च आके कंगले दे सिर ताज सजा सकदी है,

मैं भी हां मुश्किल विच बड़ी गर्दिश विच मेरा भी सितारा है माँ,

मेरी मेरी कलिका मइया मैनु तेरा सहारा है माँ,

तू मालिक एह दुनिया दी तेरे खेल न्यारे,

ज्योत तेरी तो लेके उजाला चमकन चन सितारे,

जग नु चलाये जो सब नु नचाये जो तेरा ही इशारा है माँ,

मेरी मेरी कलिका मइया मैनु तेरा सहारा है माँ,

तू ही शारदा तू ही लक्श्मी तू ही है माँ काली,

दुष्ट नु तू मार के करदी भगता दी रखवाली,

तेरी संगता ने तेरे भगता ने जग भी पुकारा है माँ,

मेरी मेरी कलिका मइया मैनु तेरा सहारा है माँ,

तेरे दर ते जद तो मइया किता है मैं सजदा,

मझधार विच तूफ़ाना तो दास नु डर नहीं लगदा,

कश्ती भी तू पतवार भी तू भी किनारा है माँ,

मेरी मेरी कलिका मइया मैनु तेरा सहारा है माँ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।