दूल्हा बने भोले नाथ जी हमारे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

दूल्हा बने भोले नाथ जी हमारे,

चली बारात गोरा जी के द्वारे,

इस दूल्हे पे जग है दीवाना,

दूल्हा बने भोले नाथ जी हमारे

ना रतन आभूषण तन पे,

बलिहारी जाऊ बोले पण पे,

चमके माथे पर चंदा आये शुभ दिन ये शिव की लगन के,

डाले सर्पो के हार कैसा अज़ब शृंगार ऐसा बंदा किसी ने देखा न,

दूल्हा बने भोले नाथ जी हमारे...

लम्भी लम्भी जटाओ का सेहरा कैसा प्यार विवाह का नजारा,

ध्वनि संख नाद की गूंजे संग चले बड़ो का पहरा,

होक नंदी पे सवार चले हिमाचल के द्वार,

हुआ रोशन ये तब री जग सारा,

दूल्हा बने भोले नाथ जी हमारे

चले हो के विदा जो बाराती गोरा को माँ समजाति,

जा बेटी सुखी तू रहना रहे अमर सुहाग की जोड़ी,

ये बाराती बेशुमार दिये सब को उपहार,

झूमे गल पाके सब नजराना,

दूल्हा बने भोले नाथ जी हमारे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।