साई दर न मिला

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॥ पावन पाठ ॥

साईं दर न मिला सारी दुनिया मिले भी तो कया है,

तेरे चरणों की रज मुझको मिल न स्की,

प्यास तेरे दर्श की भी भुज न स्की,

मेरा सब कुछ लुटा तू मालिक बने भी तो क्या है,

साईं दर न मिला............

मेरे जीवन का कोई सहारा न था,

जो चमका दे जीवन वो तारा न था,

जो उजाला न दे ऐसा दीपक जले भी तो क्या है,

साईं दर न मिला .......

भाग से टूट कर फूल माला बने,

खुश नसीबी है उनकी जो चरणों पड़े,

जो महक न सके एसी भगियाँ खिले भी तो क्या है,

साईं दर न मिला .

मेरी जीबया नाम गाती रही,

भाव भक्ति से तुझको भुलाती रहे,

तेरे ध्यान बिना मेरी सांसे चले भी तो क्या है,

साईं दर न मिला ............

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।