बन घुँघरू नच्चाँ मैं दर तेरे बांसुरी बजान वालेया

सर्व मोहन (टीनू सिंह)
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

दिल विच्च तार इश्क़ दी वज्दी ए, ते नाले वज्दी खंजरी ए,

मैं ते नच्च के श्याम मना लैना, भेड़े लोक केहन भावे कंजरी ए ।

नचना वी इबादत बन जांदा, नचने दा जे कोई चज होवे,

ओ वाट मक्के दी क्यों पावे, जिदा श्याम नू वेखेया हज होव ॥

बन घुँघरू नच्चाँ मैं दर तेरे, बांसुरी बजान वालेया ।

हूण वस ना रहा कुझ मेरे, मुरली बजौन वालेया ॥

घुंघरू बन लए मीरा बाई,

हरी नाम दी लगन लगायी ।

मारे गालिया दे विच्च फेरे,

मुरली बजौन वालेया ॥

बैठा होवे जे सामने जद मुर्शद, बुल्ला कर के हार श्रृंगार नच्चे ।

पत्थर पिघल के क्यों ना होवे पानी, जदों सामने यार दे यार नच्चे ॥

पैरा विच्च घुंघरू बुल्ले पाए,

नच नच मुर्शद नु ओह मनाए ।

बुल्ला नच्चे मुर्शद दे वेहड़े,

बंसरी बजौन वालेया ॥

ऐहो घुंघरू वर मैं पाए,

राधे राधे राधे नाम जपाए ।

कट जाएंगे चैरासी वाले गेडे,

बांसुरी बजान वालेया ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।