कोई नहीं है जग में मेरा

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॥ पावन पाठ ॥

कोई नहीं है जग में मेरा

मुझको सहारा साईं तेरा,

कोई नहीं है जग में मेरा

वो पत्थर ही बन गया पारस,

जिस पे डाला साईं ने डेरा,

मुझको सहारा साईं तेरा,

कोई नहीं है जग में मेरा

दीप जले आई दिवाली,

तुम आये तो बाबा हुआ सवेरा,

मुझको सहारा साईं तेरा,

कोई नहीं है जग में मेरा

तेरे दम से ही जीवन है,

जग में बाबा तू ही मेरा,

मुझको सहारा साईं तेरा,

कोई नहीं है जग में मेरा

छोड़ के दुनिया तुझको पाया,

मेरे दिल पे तेरा पेहरा,

मुझको सहारा साईं तेरा,

कोई नहीं है जग में मेरा

दास हयात ये हमसर कहता,

साईं का मैं हु साईं मेरा

मुझको सहारा साईं तेरा,

कोई नहीं है जग में मेरा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।