मेरे बाबा जैसा कोई नहीं

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॥ पावन पाठ ॥

याहा दुनिया हाथ पसारे चले जीवन साईं सहारे,

यही सुनते है सब की पुकार मेरे साईं जैसा कोई नही,

याहा दुनिया हाथ पसारे चले जीवन साईं सहारे,

ये जानते है तेरी मजबूरियां,

तेरी खुशियों से किनती है दूरियां,

कैसे किसने तेरा दिल तोडा,

कैसे किस से हुआ है बिछोड़ा,

बाबा जानते है पीड पराई,

तुझे होती कहा तन्हाई,

तेरी गम से क्यों आँख भर आई,

कली जीवन की क्यों है मुरजाई,

तेरी सुने गे दिल की बाते,

होंगी ख़ुशी में सुख की राते,

कट जायेगे सारे कलेश,

मेरे साईं जैसा कोई नही मेरे बाबा जैसा कोई नही,

क्या तदपन है क्या धड़कन,

बड जाती है क्यों ये उल्जन,

मोह माया की ये छाया,

सब देख के मन गबराया,

दुःख सुख में तब बदले गा जब जय साईं की कहे गा,

खुशियों का कमल ही खिले गा जो भावना को बदले गा,

फिर दर्शन देंगे बाबा हां निभाये गे अपना वाधा छा जायेगे फिर से बहार,

मेरे साईं जैसा कोई नही मेरे बाबा जैसा कोई नही,

गिरतो का यही है ठिकाना,

इस दर को न भूल जाना,

जो भोले गा मीठी गोलियां भर जायेगी तेरी झोलियाँ,

तेरी रोज मने गी दिवाली न जायेगा दर से तू खाली,

जिस भगियाँ का साईं हो माली वाह रहे गी सदा खुश हाली,

बंद शीश निभा ले साईं को,

भक्ति से रजा ले बाबा को यही सुनते सभी की पुकार,

मेरे साईं जैसा कोई नही मेरे बाबा जैसा कोई नही,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।