मेरे सजदों का कुछ तो सिला दीजिये

पारंपरिक
अन्य भजन साईं भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

मेरे सजदो का कुछ तो सिला दीजिये,

शिर्डी वाले से मुझको मिला दीजिये,

न दवा दीजिये न दुआ दीजिये,

साईं बाबा हमे आसरा दीजिये,

मेरे सजदो का कुछ तो सिला दीजिये,

आप के नाम से हर ख़ुशी मिल गई,

ये दीया जल गया रोशनी मिल गई,

अपने दीवाने को और क्या दीजिये,

शिर्डी वाले से मुझको मिला दीजिये,

मेरे सजदो का कुछ तो सिला दीजिये......

इक तरफ ये जहान इक तरफ आंधियां,

एक तरफ रहमते एक तरफ शोहरते,

तूने इतना दिया क्या से क्या कर दियां,

मंजिलो का हमें भी पता दीजिये,

मेरे सजदो का कुछ तो सिला दीजिये......

तेरी नजरो में वो शाने कुदरत मिली,

जिसने देखा तुझे उसको रहमत मिली,

प्यास भुज न सके मेरे जज्बात की,

साईं नजरो से अपनी पिला दीजिये,

मेरे सजदो का कुछ तो सिला दीजिये......

मैंने दिल तेरे चरणों में अर्पित किया,

मैं हु जोगन तेरी तू है मेरा पीया,

रिश्ते नाते सभी भूल बेठी हु मैं,

अपने दामान में मुझको छुपा लीजिये,

मेरे सजदो का कुछ तो सिला दीजिये......

जब न मन साफ़ हो कैसा मंदिर हुआ,

जो चमक ने लगा वो ही चंदर हुआ,

जो जहां ने दिया तुजसे सब कह दियां,

मेरे जख्मो पे मरहम लगा दीजिये,

मेरे सजदो का कुछ तो सिला दीजिये......

तुझसा हमसर नही साईं पत्थर नही,

जो बदल न सके वो मुकदर नही,

जो खटा हो गई माफ़ कर दीजिये,

साईं बाबा मेरा फेंसला कीजिये,

मेरे सजदो का कुछ तो सिला दीजिये......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।