क्या भरोसा है इस ज़िंदगी का

ओसमान मीर
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॥ पावन पाठ ॥

क्या भरोसा है इस ज़िंदगी का

साथ देती नहीं यह किसी का

सांस रुक जाएगी चलते चलते,

शमा बुज जाएगी जलते जलते ।

दम निकल जायेगा रौशनी का ॥

क्या भरोसा है...

हम रहे ना मोहोबत रहेगी,

दास्ताँ अपनी दुनिया कहेगी ।

नाम रह जाएगा आदमी का ॥

क्या भरोसा है...

दुनिया है इक हकीकत पुरानी,

चलते रहना है उसकी रवानी ।

फर्ज पूरा करो बंदगी का ॥

क्या भरोसा है...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।