बेटियां घर को सम्बालती है बेटियां

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॥ पावन पाठ ॥

बेटियां घर को सम्बालती है बेटियां,

बेटियां दुःख दर्द टाल ती है बेटियां,

ख़ुशी की दुआ होती है बड़ी खुश नुमा होती है,

रब की दया होती है बेटियां,

बेटियां घर को सम्बाल ती है बेटियां,

उस मालिक की हर रचना बेटी से पूरी होती,

बेटी न शामिल हो तो हर ख़ुशी अधूरी होती,

खुश की दुआ होती है बड़ी खुश नुमा होती है,

रब की दया होती है बेटियां,

बेटियां घर को सम्बाल ती है बेटियां,

इक ऐसा एहसास बेटी शब्दों से जो परे है,

खुश किस्मत होता है जो इसको महसूस करे है,

खुश की दुआ होती है बड़ी खुश नुमा होती है,

रब की दया होती है बेटियां,

बेटियां घर को सम्बाल ती है बेटियां,

बेटी जिस आंगन में खेले उस घर में सुख बरसे,

दुनिया की हर एक उदासी दूर रहे उस घर से,

खुश की दुआ होती है बड़ी खुश नुमा होती है,

रब की दया होती है बेटियां,

बेटियां घर को सम्बाल ती है बेटियां,

धन से कोई धनी नही होता कहते लोग सयाने,

धनि है जो बेटी बेटे में फर्क न कोई माने,

खुश की दुआ होती है बड़ी खुश नुमा होती है,

रब की दया होती है बेटियां,

बेटियां घर को सम्बाल ती है बेटियां,

इक सभ्यता इक शराफत इक रूहानी जन्नत,

वस्ती उस घर में साहिब यहाँ बेटी की हो इज्जत,

खुश की दुआ होती है बड़ी खुश नुमा होती है,

रब की दया होती है बेटियां,

बेटियां घर को सम्बाल ती है बेटियां,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।