मैया जी दी हज़ारिया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

चलो नच नच नच के लगावा गे,

लगावागे मैया जी दी हजारिया,

सारे रल मिल के भंगड़ा पावा गे,

लगावागे मैया जी दी हजारिया,

मेरी महा माई की जो महिमा तू गाये गा,

सोया जो नसीबा तेरा आज जाग जायेगा,

करे अखियाँ तू बंद कटे तेरे सारे फंद

परिवार च भंगड़ा पावा गे,

लगावागे मैया जी दी हजारिया,

सिर को झुका के माँ से बोल दे तू सारा हाल,

जाये खाली हाथ आएगा तू होके माला माल,

माँ के खुले है खजाने जिनका भेद ना कोई जाने मुहो म्नगियाँ मुरादा पावा गे,

लगावागे मैया जी दी हजारिया,

हो गी जो दयाल माँ का जागरण करावा गे,

सारी रात ताडीया बजा के गुण गावा गे,

दोडा आएगा सुजान ओ करे माँ का गुण गान,

तेरी कंजका नु भोग लगावा गे,

लगावागे मैया जी दी हजारिया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।