भोला गँगा त्रिशूल डमरुवाला

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

अरे भंग का रंग जमा हो चकाचक

फिर बोलो नमः शिवाय,

अरे ऎसा झटका लगे जिया पर पुनरजन्म हुई जाये,

अरे भोला गँगा त्रिशूल डमरू वाला,

ओ पी के भन्ग तरंग का प्याला,

नाचे हो के मगन मतवाला,

फिर तो ऐसा करे तांडव

के थर थर कांपे है त्रिकाल

भोला गँगा त्रिशूल डमरू वाला,...

अरे राम दुहाई मै तो मस्ती मे आ गया हाय हाय हाय,

इसकी शरण है पाई मै तो मुक्ती को पा गया हाय हाय हाय,

अरे कैसा सीधा साधा ये कैसा भोला भाला( हा हा),

जाने कौन घडी मे पड गया शिवभक्ति का उजाला,

इसकी भक्ति में हुआ निहाल,

भोला गंगा त्रिशूल डमरू वाला,

ओ पी की भन्ग तरंग का प्याला...

(अरे ओ मैया हमरे संग नाचा हो नाचा)

इक कन्या कुवारीं इसकी भक्ती मे रम गयी हाय हाय हाय,

दक्ष राजकुमारी इसकी सुरत पे मर गई हाय हाय हाय,

अरे कैसी गौरी गौरी वो माता जग की सारी (हा हा),

करके जोरा जोरी कर गयी इसके मन की चोरी,

इनकी शरण मे जीवन का सार...

भोला गँगा त्रिशूल डमरूवाला

ओ पी के भन्ग तरंग का प्याला

..

प्रेषक

प्रफुल्ल भाऊ

8269753380

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।