करदे करम दाता

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॥ पावन पाठ ॥

करदे करम दाता, बसे दरबार तेरा,

मैनु कदमा नाल ला, मेरी बिगड़ी बना,

कांसा भरदे तू मेरा, बसे दरबार तेरा,

करदे करम दाता,,,,,,,,,

मेरी सच्ची सरकार, मैंने चरणां नाल ला,

कांसा भरदे तू मेरा,,,,,,,

मैं चंगी हां या मंदी हां,पर दाता तेरी बंदी हां,

मेरी सच्ची सरकार, मैंने चरणां नाल ला,

कांसा भरदे तू मेरा,,,,

मंगदा ऐथों सारा ज़माना, दाता तेरियां उचियाँ शानां,

हर मुसीबत टली, करदे सबकी भली,

दाता पावें जे फेरा, करदे,,,,,,,

दे दे तूँ कदमा विच थांवां,कर मंजूर बक्श खतावां,

मेरे हुंदे नीं गुज़ारे, किसे होर द्वारे,

दिल लगदा नीं मेरा,करदे,,,,,,,,,

मैं सदके ते मैं बलिहारी, तेरे नाल है रौनक सारी,

तेरे दीवाने आये, बैठे महफ़िल सजाये,

तेरा भरनाये बेहड़ा, करदे,,,,,,

पंडित देव शर्मा

श्री दुर्गा संकीर्तन मंडल

रानिया,सिरसा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।