माँ दे दरों भगता

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ दे दरों -२ भगता, मंगियाँ मुरादां नूँ तू पायी जा,

तेरी सुनूँ फ़रियाद, मेरा पूरा विश्वास,

तू दाती माँ नूँ अपनी ध्याई जा,ध्याई जा,

माँ दे दरों.....

जगदियां जोतां वाली सुनूँ फ़रियाद वे,

कष्ट क्लेशां तों तूँ होजेंगा अज़ाद वे,

कर मैया जय नूँ प्यार, तैनू होवेगा दीदार,

जोत नाम वाली दिल च जगाई जा,

माँ दे दरों.....

ओ पापां वाली बेड़ी कदे लगदी न पार वे,

ओ दुष्टां नूँ देंदी मैया पलां विच मार वे,

होजू पार किनारा, मैया दिंदी है सहारा,

जीवन अपना तू सफ़ल बनाई जा,

माँ दे दरों.....

बनके सवाली वे तूँ मैया दर चल वे,

पापां वाले दिल विचों कढ्ढ तूँ छल वे,

नाल माँ नूँ मिला लै,भेटां माँ दियां गा लै,

गुण माँ दे फ़कीरां दे तूँ गायी जा,

माँ दे दरों.....

पंडित देव शर्मा

श्री दुर्गा संकीर्तन मंडल

रानिया सिरसा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।