मैं गुरु जी दीवाना मेरे गुरु बादशाह है

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॥ पावन पाठ ॥

मुझे लोगो से क्या वास्ता मिला गुरु जी का रास्ता,

चैन मिला है मुझे इस दर से इस दर से वास्ता है,

मैं गुरु जी दीवाना मेरे गुरु बादशाह है,

ये इश्क़ का सौदा है लोको मिलते नजर ही हो जाये,

देखो मुखड़ा गुरु का अब मुझको कोई न भाये,

गुरु जी सब तो सोहना है तन मन मेरा फ़िदा है,

मैं गुरु जी दीवाना मेरे गुरु बादशाह है,

गुरु जी ने जलवा दिखाया है मुझको अपना बनाया है,

रोके न मुझको अब दुनिया मुझे डुगरी नगरी जाना है

तुझसे अब मैं क्या मांगू सब कुछ ही मिल गया है,

मैं गुरु जी दीवाना मेरे गुरु बादशाह है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।