मेरे शिनशाह मैनू चरना च रख ले

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

मेरे शिनशाह मैनू चरना च रख ले

एक नज़र मेहर दी कर ले

मैं तेरे दर ते मर जावा

तेरे नाम ए जिन्दडी कर जावा

मैं होर किसे तो की लेना

तेरे नाम दा अमृत पी लेना

इस कमली दा वी पख ले

मेरे........

चाहे चन्गी आ चाहे मन्दी आ

तेरे नाम दे रंग विच रंगी आ

इस जग तो हुन मैं की लेना

मैं तेरे दर दी बन गयी आ

मैनू एक वारि दर ते सद ले

मेरे.........

भावे जग सारा मैं फोल लवा

तेरे वरगा दाता लब्ना नही

मैं द्वार तेरे आ बैठी

हुन दर तेरे मैं छड़ना नही

मेरी इक लड़ कवारी बाह फड ले

मेरे...........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।