मैं तेरे कोलों तैनु मंग लॉ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

वर देवे जे इक मैनु माये,

मैं तेरे कोलों तैनु मंग लॉ

आस मेरी जे इक तू पुगाये मैं तेरे कोलो तनु मंग न,

दौलता ते शोहरता दा रवे मेनू लोब न,

लालच च दा सागर भी सके मेनू डोब न,

इस काबिल जे मेनू तू बनाये,

मैं तेरे कोलों तैनु मंग लॉ.......

छड के जहान सारा तेनु ही मैं मंगला,

रोम रोम अपना मैं रंग तेरे रंगना,

एसी किरपा जे तू बरसाये,

मैं तेरे कोलों तैनु मंग लॉ

बछड़े निमाने दा रख ले तू मान माँ,

मंगना नही बोहता देदे इक वरदान माँ,

मान मेरा ये अज तू वदाये,

मैं तेरे कोलों तैनु मंग लॉ.......

करमा ख्याल दिल कमल दा तोड़ी न,

आख दा है सागर तेनु आखा मेरा मोड़ी न.

गल मेरी जे मन माँ तू जाये,

मैं तेरे कोलों तैनु मंग लॉ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।