कंदा नाल गल्ला करां सांवरे मैं तेरियां

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कंदा नाल गल्ला करां, सांवरे मैं तेरियां,

ज़िन्द मुक गयी, गल्ला मुकियां ना मेरियां

हो, सारी सारी रात मैनू नींद ना आवे,

प्यारे याद तेरी बहुत सतावे,

हो, गमां दियां रातां दाता , लम्बियां लम्बेरियाँ

ज़िन्द मुक गयी, गल्ला मुकियां ना मेरियां...

हो, कोठे चढ़ चढ़ काग उडावां ,

श्याम सुंदर तेरी बाट निहारां,

हो, मेरी वारी हुन लाईयां कानू दरियां

ज़िन्द मुक गयी, गल्ला मुकियां ना मेरियां...

हुन वी ना आये प्यारे, फिर कदों आओगे,

असी वी नी रहना किस्नूं अपना बनाओगे,

हो, पीछे रह जानगियाँ मिटटी दियां ढेरियाँ ,

ज़िन्द मुक गयी, गल्ला मुकियां ना मेरियां...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।